संजय व्यास

Friday, May 24, 2019

जब परिचित लोगों में ज़्यादा संख्या मरे हुओं की हो जाती है

›
इतालो कल्विनो की मशहूर किताब 'इनविजिबल सिटीज़' बहुत समय से मेरे पास है।  किताब को मैंने अपने मुताबिक इस तरह बनाया है कि इसे जब ...
3 comments:
Monday, March 18, 2019

ढाबा

›
वो इस मैदानी शहर की सर्द रात थी। अरसे  बाद वो यहां आया था। इस शहर की एक ख़ासियत थी। ये शहर जल्दी सो जाता था।  दिन भर ये शहर भीड़ भाड़ ...
6 comments:
Wednesday, September 26, 2018

इंडियन स्पाइसेज़

›
(1) वो ज़्यादातर चुप रहता था. इसके बारे में निश्चित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता था किउसकी आदत कम बोलने की थी या उसे ज्यादा बोलना ...
1 comment:
Wednesday, January 3, 2018

फ़ीके रंग वाला फूल

›
कितने आक्रामक लगते है ये चटख रंग. कांच के टुकड़ों की तरह आँखों में घुसे जाते हैं. गमलों में उगे कोमल और कृशकाय पौधों पर किसने इतने गहरे...
1 comment:
Thursday, December 21, 2017

झूला पुल

›
क्या कोई खिलौना ट्रांजिस्टर बज सकता है? क्या किसी नक़ली घड़ी की सुइयां चल सकती है? उसके लिए इसका उत्तर 'ना' में नहीं था. ...
1 comment:
›
Home
View web version
My photo
sanjay vyas
मैं सिर्फ ख़ुद को नहीं लिखता. मेरे हर लिखे में भी मैं नहीं होता, अलबत्ता मेरे दस्तख़त मेरे लिखे में ज़रूर मिलते हैं और मैं उनके पीछे कहीं छुपा रहता हूँ. इस तरह मेरी तलाश मेरे लिखे में ही कहीं ख़त्म होती है.
View my complete profile
Powered by Blogger.